पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:30 बजे से दोपहर 01: 30 तक है

अररिया (बिहार) ◆सरस्वती पूजा को लेकर पूरे शहरी इलाके में धूम मची हुई है। लोग प्रतिमा को पूजा स्थल पर ले जा रहे हैं तो कहीं बाजार में पूजा में इस्तेमाल होने वाले प्रसाद की खरीदारी में लोग जुटे हुए हैं। इस बार बसंत पंचमी का त्योहार बुधवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती के भक्त उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।पूजा का विशेष महत्व शिक्षा से जुड़े युवाओं में होता है। इसलिए स्कूलों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी विद्या की देवी की पूजा धूमधाम से की जाती है। बता दें की इस बार सिर्फ शहर में दो सौ से अधिक जगहों पर सरस्वती पूजा का आयोजन किया जा रहा है। पंडित  जी ने बताया कि आज सरस्वती पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसलिए इस मुहूर्त में मां सरस्वती की पूजा करने से वो प्रसन्न होती हैं।ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और उन्नति की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को ज्ञान का बोध होता है और उसके जीवन में
अज्ञान का अंधकार कभी भी जन्म नहीं ले पाता है। अररिया शहर के पंजाब नेशनल बैंक के पीछे प्रतिमा निर्माण करने वाले कलाकार संतोष कुमार पंडित ने बताया कि इस बार प्रतिमाओं का
अच्छा ऑर्डर मिला था। सिर्फ मेरे द्वारा डेढ़ सौ के
करीब सरस्वती जी की प्रतिमा बनाई गई थी। जो
लगभग बिक चुका है।संतोष ने बताया कि मेरे जैसे प्रतिमा बनाने वाले कारीगर शहर में दो दर्जन के करीब हैं। सभी ने काफी संख्या में प्रतिमा का निर्माण किया । जिसे खरीदकर लोग ले जा रहे हैं। शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी भव्य रूप से सरस्वती पूजा की जाती है। प्रायः सभी स्कूलों में सरस्वती पूजा हो रही है। इसके साथ ही जगह जगह पर छात्र मूर्ति स्थापित कर सरस्वती पूजा कर रहे हैं। पूरे शहर में लाउडस्पीकर की आवाज गूंज रही है। बता दें कि शांति समिति की बैठक में एसडीओ ने सभी सार्वजनिक रूप से पूजा करने वाले लोगों से अपील की थी कि इसबार लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद नगर थाना में कुल 46 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। इन आवेदकों को लाइसेंस निर्गत किया जाएगा।इस के  बावजूद दर्जनों की संख्या में सार्वजनिक रूप से पूजा पंडाल बनाकर पूजा की जा रही है ।