एफएनडी के मामले बढ़े बीमारी गंभीर की श्रेणी मेंनहीं पर देखभाल जरूरी

अररिया (बिहार) ◆पिछले साल मॉनसून के दौरान जिले के रानीगंज प्रखंड के चिरवाहा टोला में अज्ञात बीमारी से आधा दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदेश के सरकार के स्वास्थ्य विभाग की टीम से लेकर केंद्र की टीम तक ने जांच की थी, पर नतीजा कोई खास नहीं निकला था। अब फिर से अररिया में एफएनडी(फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर) बीमारी से हड़कंप मच गया है। सिर्फ सदर अस्पताल में बीते 24 घंटे में एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बीते शुक्रवार को सदर अस्पताल में एफएनडी के 13 किशोर-किशोरी भर्ती हुए सभी को इलाज के बाद घर जाने की अनुमति दे दी गई। शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह तक अलग अलग मोहल्लों से ऐसे केस सामने आए हैं। उसी में से एक किशोरी को गंभीर स्थिति होने पर रेफर कर दिया गया। इसमें से ज्यादातर स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हैं। थे।एफएनडी बीमारी को लेकर सदर अस्पताल के फिजिशियन डॉ कुमार मारतंडे ने बताया कि यह बीमारी लाइलाज या गंभीर नही है। लेकिन सतर्कता जरूरी है। एफएनडी कार्यात्मक तंत्रिका संबंधी विकार यह एक ऐसी स्थिति है। जिसमें मस्तिष्क और शरीर के बीच संकेतों के संचरण में समस्या होने लगती है, जिससे मस्तिष्क ठीक से नहीं करता है। इससे विभिन्न प्रकार के शारीरिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे कि कमजोरी, दौरे, या संवेदी समस्याएं। कुछ लोगों में, लक्षण अल्पकालिक होते हैं। जबकि कई लोगों में यह वर्षों तक रह सकते हैं। इसमें व्यक्ति में दौरे जैसी ही गति, संवेदना और व्यवहार के दौरे पड़ने लगते हैं। अस्थायी रूप से ध्यान या स्मृति की हानि हो सकती है। व्यक्ति भ्रमित भी हो सकता है(बिना हिले) का अनुभव कर सकता है। व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं या पर्यावरण से विघटित (या विच्छिन्न) महसूस कर सकता है। चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी से बचाव के लिए मरीज को चीनी पानी का घोल देना चाहिए । निकट में ऑक्सीजन की व्यवस्था हो तो मरीज को जल्द लगवाएं।

रिपोर्टिंग
राहुल यादव, अररिया,बिहार