अररिया (बिहार) ◆होली के जश्न को लेकर शहर से लेकर गांवों तक तैयारियां शुरू हो गई हैं। रंगों के इस पर्व के लिए बाजारों में अबीर-गुलाल और पिचकारियों की दुकानें सज चुकी हैं। हिंदू धर्म में होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस वर्ष 3 मार्च 2026 को पड़ने वाले होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है।इसी कारण इस बार 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली मनाई जाएगी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। जानकारी के अनुसार 3 मार्च को दोपहर 1 बजे से शाम 6:46 बजे तक सूतक काल प्रभावी रहेगा। इस अवधि में सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाएंगे।मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानु बाबा ने बताया कि भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव 3 मार्च को शाम 6:26 बजे चंद्रोदय के साथ दिखाई देगा और 6:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर
2:16 बजे से प्रारंभ हो जाएंगी, लेकिन सूतक काल का विशेष
महत्व दोपहर 1 बजे से माना जाएगा।ग्रहण के बाद करें शुद्धिकरण नानु बाबा के अनुसार ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें । होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ग्रहण काल के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का मानसिक जाप करने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है। मान्यता है कि इन नियमों के पालन से ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
रिपोर्टिंग
विकाश कुमार सिंह,अररिया,बिहार