बाल विवाह के खिलाफ तिरस्कुंड में जागरूकता कार्यशाला आयोजित

अररिया (बिहार) ◆फारबिसगंज अनुमंडल के तिरस्कुंड पंचायत अंतर्गत आदिवासी टोला गोलाबाड़ी में बुधवार को बाल विवाह के सरवाइवर्स (पीड़ित बच्चों) के साथ एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जागरण कल्याण भारती, फारबिसगंज एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत समिति सदस्य उपेंद्र कुमार सोरेन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी बसंत कुमार सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जागरण कल्याण भारती के अध्यक्ष संजय कुमार ने किया।
कार्यशाला का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इससे प्रभावित बच्चों एवं सरवाइवर्स को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में स्थानीय धर्मगुरु शिबू बाबा ने भी भाग लिया। उन्होंने समाज से बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि सामाजिक एवं धार्मिक स्तर पर इस कुरीति का विरोध आवश्यक है। उनके संबोधन से आदिवासी समाज के लोगों में जागरूकता का सकारात्मक संदेश पहुंचा।
जागरण कल्याण भारती के डीसी दीपक कुमार पासवान ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि कानून के अनुसार विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, पंडित, काजी अथवा वयस्क दूल्हे को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह का शिकार बनने वाली बच्चियों में कुपोषण, एनीमिया, मानसिक अवसाद और घरेलू हिंसा का खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र में विवाह होने से उनकी शिक्षा बाधित होती है, शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रभावित होता है और वे आत्मनिर्भर बनने के अवसरों से वंचित रह जाती हैं।
कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालय आदिवासी टोला मधुरा के प्रधानाध्यापक मिथिलेश कुमार सिंह, समाजसेवी कुमार राजीव रंजन, अभिषेक कुमार, पंचायत के विकास मित्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं बच्चियां उपस्थित थीं। सभी ने अररिया जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की शपथ ली।
वक्ताओं ने कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले या किसी बच्चे की सुरक्षा खतरे में हो, तो तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112, महिला हेल्पलाइन 181 अथवा राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) हेल्पलाइन 15100 पर  संपर्क करें।
कार्यक्रम का समापन "सुरक्षित बचपन – सुरक्षित भविष्य" तथा "हर बच्चे का अधिकार – सुरक्षा, शिक्षा, सहभागिता और सम्मान" के संदेश के साथ हुआ।