अररिया (बिहार) ◆ पलासी प्रखंड क्षेत्र के किसान चौक स्थित माता स्थान सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में दुर्गापूजा को लेकर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। इस प्राचीन आस्था स्थल से जुड़ी मान्यताएं और पूजा की परंपराएं श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती हैं। नवरात्र के दौरान यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त माता रानी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में पूजा को लेकर तैयारियां की जाती हैं और दुर्गापूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ जाती है।
मंदिर कमिटी से मिली जानकारी के अनुसार, माता स्थान किसान चौक मंदिर की स्थापना वर्ष 2010 में परिवार के सदस्यों के प्रयास से भूमि दान में प्राप्त कर की गई थी। इसके बाद वर्ष 2012 में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर पूजा-अर्चना की परंपरा को आगे बढ़ाया गया। इसी वर्ष मंदिर का भव्य उद्घाटन किया गया था। तब से यह मंदिर सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष दुर्गापूजा के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि माता रानी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। इसी विश्वास के साथ भक्त माता के चरणों में माथा टेकते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करते हैं। मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी क्षेत्र में प्रचलित हैं। मंदिर कमिटी के कुछ सदस्यों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार, माता रानी का शेर रात में चौक का भ्रमण कर क्षेत्र की रक्षा करता है। कमिटी के सदस्यों ने यह भी बताया कि जब-जब मंदिर में चोरी की घटनाएं हुईं, तब-तब चोर पकड़े गए। इन मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच मंदिर के प्रति विशेष विश्वास बना हुआ है।
षष्ठी से शुरू होती हैं विशेष धार्मिक परंपराएं
माता स्थान किसान चौक दुर्गा मंदिर में नवरात्र के दौरान पूजा की विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है। षष्ठी पूजा के दिन संध्या के समय बेल की पूजा की जाती है। इसके बाद सप्तमी के दिन दो बेल वाले डाल को काटकर लाया जाता है। इस धार्मिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर में इन परंपराओं का निर्वहन विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया जाता है। पूजा के दौरान कमिटी के सदस्य तथा स्थानीय श्रद्धालु अपनी भागीदारी निभाते हैं।
अष्टमी के निर्जला उपवास के बाद नवमी को करते हैं अन्न ग्रहण
मंदिर में अष्टमी और नवमी की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं के अनुसार, अष्टमी के दिन कई भक्त निर्जला उपवास रखते हैं। ऐसे श्रद्धालु नवमी के दिन सुबह करीब छह बजे माता रानी का दर्शन करने और पूजा-अर्चना के बाद ही अन्न-पानी ग्रहण करते हैं। इस दौरान मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसाद वितरण किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। भक्त माता का प्रसाद ग्रहण कर परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना करते हैं।
दशहरा के दिन मेले में उमड़ती है भीड़
दशहरा के अवसर पर किसान चौक स्थित माता स्थान दुर्गा मंदिर परिसर में मेले का आयोजन होता है। मेले में आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना के साथ मेले का आनंद लेने के लिए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में भी उत्साह रहता है। मंदिर परिसर और किसान चौक में त्योहार को लेकर विशेष रौनक देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है।
22 अक्टूबर की रात होगा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम
दुर्गापूजा के अवसर पर 22 अक्टूबर 2026 की रात चुनिंदा कलाकारों द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह है। आयोजन के माध्यम से धार्मिक वातावरण के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनंद लेने का अवसर मिलेगा। मंदिर कमिटी की ओर से पूजा और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।किसान चौक का माता स्थान दुर्गा मंदिर वर्षों से स्थानीय लोगों की आस्था, विश्वास और परंपरा का प्रतीक बना हुआ है। भूमि दान से शुरू हुई इस धार्मिक पहल ने आज सार्वजनिक दुर्गा मंदिर का रूप ले लिया है। नवरात्र के दौरान होने वाली विशेष पूजा, नवमी का प्रसाद वितरण, दशहरा मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस मंदिर के धार्मिक आयोजन को खास बनाते हैं।