कोसी स्नातक सीट पर 52.51% मतदान, तीसरी जीत की हैट्रिक लगाने उतरे डॉ. एनके यादव; जनसुराज समेत 15 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद

पूर्णिया (बिहार) ◆पूर्णिया/कोसी। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शाम चार बजे तक 52.51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस सीट पर कुल 15 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मतदान के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई है। अब सबकी निगाहें मतगणना और चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव एनडीए, महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के बीच मुकाबले के कारण खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, वीआईपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बम भोला सहनी भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सभी उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं।
पूर्णिया के 17 बूथों पर कड़ी सुरक्षा में मतदान
पूर्णिया में कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए बनाए गए सभी 17 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान कराया गया। निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए गए थे।दोपहर दो बजे तक स्नातक सीट पर 34.03 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया निर्धारित समय तक जारी रही और शाम चार बजे मतदान समाप्त हो गया। मतदान खत्म होने के बाद सभी पोलिंग पार्टियों को सीलबंद मतपेटियों और चुनाव सामग्री के साथ जिला स्कूल स्थित रिसेप्शन सेंटर पहुंचना था। यहां बिहार विद्यालय परीक्षा समिति भवन की तीसरी मंजिल पर बनाए गए सुरक्षित स्ट्रांग रूम में मतपेटियों को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखने की व्यवस्था की गई है।
रोजगार और बदलाव बना प्रमुख मुद्दा
मतदान के दौरान रोजगार, शिक्षा और क्षेत्र के विकास जैसे मुद्दे मतदाताओं की प्राथमिकता में रहे। पूर्णिया में 77 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक सच्चिदानंद झा ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि चुनाव जीतकर आने वाले प्रतिनिधियों को जनता के हित में काम करना चाहिए। उनके अनुसार रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है और जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में गंभीरता से पहल करनी चाहिए।वहीं, पहली बार मतदान करने पहुंचीं शिल्पा सिन्हा ने कहा कि वह बदलाव की उम्मीद लेकर वोट डालने आई हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की काफी जरूरत है। मतदाताओं की इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि प्रत्याशियों के सामने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती रहेगी।
डॉ. एनके यादव की नजर जीत की हैट्रिक पर
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा एमएलसी डॉ. एनके यादव की उम्मीदवारी सबसे अधिक चर्चा में रही। भाजपा ने उन्हें लगातार तीसरी बार चुनावी मैदान में उतारा है। डॉ. यादव ने वर्ष 2014 और 2020 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इस बार उनकी नजर जीत की हैट्रिक पर है।
मूल रूप से झारखंड के गोड्डा जिले के निवासी डॉ. एनके यादव ने भागलपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। चिकित्सा सेवा और सामाजिक गतिविधियों के साथ उनका राजनीतिक सफर भी लंबे समय से जारी है।उनकी पत्नी डॉ. वीणा यादव वर्ष 2007 से 2012 तक भागलपुर नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं। डॉ. एनके यादव ने वर्ष 2009 में भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में वे भागलपुर सदर सीट से राजद-लोजपा गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार बने। बाद में वे भाजपा से जुड़ गए। इस बार उनके सामने अपनी पिछली जीत को दोहराने और तीसरी बार विधान परिषद पहुंचने की चुनौती है।
राजद ने नितेश यादव पर जताया भरोसा
महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने नितेश यादव को उम्मीदवार बनाया है। वे वर्ष 2020 के विधान परिषद चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। भागलपुर जिले के नारायणपुर निवासी नितेश यादव किसान परिवार से आते हैं। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठानी शुरू की और क्षेत्र में छात्र हितों के सवालों को लेकर सक्रिय रहे।राजद को उम्मीद है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय संपर्क के आधार पर नितेश यादव इस बार मुकाबले को मजबूत बनाएंगे। हालांकि, चुनाव में उनकी सफलता मतदाताओं के समर्थन पर निर्भर करेगी।
कांग्रेस ने पुराने कार्यकर्ता मनोज जायसवाल को बनाया प्रत्याशी
कांग्रेस ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपने पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता मनोज जायसवाल को उम्मीदवार बनाया है। फारबिसगंज के रहने वाले मनोज जायसवाल पेशे से वकील हैं। वे लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं और छोटे-बड़े चुनावों में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।मनोज जायसवाल छात्र हित, शिक्षकों की समस्याओं, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार उन पर भरोसा जताकर कोसी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
जनसुराज की पहली परीक्षा, रजनीश रंजन मैदान में
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने पहली बार विधान परिषद चुनाव में उतरते हुए रजनीश रंजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। सहरसा के रहने वाले रजनीश रंजन शिक्षा और छात्र हित से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्होंने कोसी क्षेत्र में विद्यार्थियों से संबंधित समस्याओं को उठाना जारी रखा। रजनीश रंजन ने सहरसा में टीचर ट्रेनिंग कॉलेज की शुरुआत की। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी गतिविधियों के कारण उन्हें शिक्षाविद् के रूप में भी पहचान मिली है। जनसुराज के लिए यह चुनाव संगठन की राजनीतिक ताकत और मतदाताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
बम भोला सहनी ने भी किया जीत का दावा
वीआईपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बम भोला सहनी इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। मतदान के बाद उन्होंने अपनी जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि जनता उनके साथ है। अब चुनाव परिणाम से ही स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस प्रत्याशी पर सबसे अधिक भरोसा जताया है।
16 नवंबर को समाप्त हो रहा मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इस चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 60 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।फिलहाल मतदान संपन्न होने के बाद सभी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, छात्र हित और बदलाव जैसे मुद्दों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता लगातार दो बार जीत चुके डॉ. एनके यादव को तीसरा मौका देते हैं या इस बार किसी नए चेहरे पर भरोसा जताते हैं।