बौंसी (बिहार) ◆ प्रखंड का कचनसा गांव अमर शहीद क्रांतिकारी चार भाइयों में जागो शाही, लक्खी शाही, रामेश्वर शाही एवं पागो शाही शामिल हैं। इनमें दो भाइयों जागो शाही और लक्की शाही को ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारी गतिविधि में शामिल होने पर 25 जुलाई 1944 को केंद्रीय कारा भागलपुर में फांसी पर लटका दिया था।
दो भाई पागो शाही एवं रामेश्वर शाही को अंग्रेजी सरकार ने आजीवन कारावास की सजा दी थी। 1947 में देश आजाद होने के बाद दोनों को रिहा कर दिया गया था। पर बलिदानी के स्वजन सरकार की उदासीन रवैया से व्यथित हैं। शहीद के गांव में आज तक चारों भाईयों के नाम पर सरकार शहीद स्मारक व शहीद तोरण द्वार तक का निर्माण नहीं करा पाई है।
वर्तमान में शहीद चारों भाइयों के स्वजनों में एकमात्र चश्मदीद शहीद पागो शाही की विधवा सुंदरी देवी बची है। क्रांतिकारी पागो शाही के छोटे पौत्र रामेश्वर शाही ने बताया कि स्वजनों में किसी को एक सरकारी नौकरी तक भी नसीब नहीं हो पाई है। शहीद क्रांतिकारी की पत्नी सुन्दरी देवी के तीन पुत्र जयकांत शाही, नीलकांत शाही व रामविलास शाही हैं। शहीद की पत्नी की इच्छा है कि अमर शहीद की याद में गांव में कम से कम एक भव्य तोरण द्वार का निर्माण हो। आज आजादी का अमृत महोत्सव देश मना रहा है। पर एक बलिदानी परिवार की अनदेखी पर ग्रामीणों में दुख है। चारों भाइयों से अंग्रेजी हुकूमत इतनी घबरा गई थी कि गांव में गांव में कैंप लगाकर कच्चे मकानों को हाथी से रौंदवा दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में भागलपुर के डीएम ने 1972 में शहीद पागो शाही की पत्नी सुंदरी देवी को ताम्रपत्र दिया गया था।
(रिपोर्टर - दिलावर अंसारी, बिहार)