अररिया (बिहार) ◆ एंबुलेंस की कमी से जूझ रहा है अररिया का सदर अस्पताल। जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में मरीजों को लाने और ले जाने वाले एम्बुलेंस की कमी है। इस वक्त सदर अस्पताल में सात एम्बुलेंस और एक शव वाहन है। अगर लंबी दूरी के रेफर मरीज को एम्बुलेंस लेकर जाती है तो उसे आने में दो से तीन दिन लगता है। ऐसे में एम्बुलेंस की कमी हो जाती है। जिस कारण मरीजों को महंगे निजी एम्बुलेंस या फिर निजी वाहन से ले जाना पड़ता है। ऐसी समस्या अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज के साथ प्रखंड के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर भी होती है। इससे भी ज्यादा समस्या शव वाहन की कमी के कारण हो रही है। बता दें की जिले के 33 लाख की आबादी पर महज एक शव वाहन है। इस कारण लोगों को शव लाने ले जाने में परेशानियों का सामना पड़ता है। जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार के गाइडलाइन के अनुसार जिले में इस वक्त 33 एंबुलेंस कार्यरत है। हमारे सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंबुलेंस की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि इस वक्त एक लाख की आबादी पर एक एंबुलेंस की व्यवस्था है। जो स्वास्थ्य विभाग के निर्देश अनुसार इसे पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी कोई एंबुलेंस खराब हो जाए तो थोड़ी परेशानी होती है। लेकिन हम लोग जल्द ही इसे ठीक कराकर फिर से एंबुलेंस को ड्यूटी पर लगा देते हैं। कह सकते हैं कि इस समय हमारे जिले को पर्याप्त मात्रा में एंबुलेंस है जिले में नौ प्रखंड है। जिनमें सिकटी, पलासी, नरपतगंज, कुर्साकांटा,भरगामा, अररिया पीएचसी व अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज, रेफरल अस्पताल रानीगंज, जोकीहाट शामिल है। उन स्वास्थ्य केंद्रों से मरीजों को रेफर कर एम्बुलेंस से अररिया सदर अस्पताल लाया जाता है। ऐसे में एंबुलेंस एक मरीज में इंगेज हो जाता है। अगर दूसरे को इमरजेंसी पड़ी तो एंबुलेंस ऐसे में उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसलिए एंबुलेंस की आवश्यकता बढ़ जाती है। अगर कोई एंबुलेंस खराब हो गया तो उससे भी सेवा ठप हो जाती है। अगर प्रखंडों में दुर्घटना के कारण किसी की मौत हो जाए तो शव को पोस्टमार्टम के लिए भी अररिया सदर अस्पताल ही लाया जाता है। ऐसे में शव वाहन की आवश्यकता अधिक होती है। लेकिन उसकी कमी के कारण शव को दूसरे वाहन सेपोस्टमार्टम कराने सदर अस्पताल लाना पड़ता है। सांसद निधि से लाइफ सपोर्ट सिस्टम भी मिला था सदर अस्पताल परिसर में दर्जनों एंबुलेंस रखे रखे कबाड़ में तब्दील होरहे हैं। 2016 में सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने सांसद निधि से अस्पताल में डोनेट किया गया था। सभी 9 प्रखंडों के साथ सदर अस्पताल को भी जीवन रक्षक सिस्टम के साथ एम्बुलेंस मुहैया कराई गई थी। यह सभी एम्बुलेंस कुछ वर्ष तो प्रखंडों के साथ सदर अस्पताल में भी चला। लेकिन देखरेख के अभाव में एंबुलेंस आहिस्ता आहिस्ता खराब होते चले गए। जिन्हें ठीक कराने के बजाय परिसर में जमा कर दिया गया। जो आहिस्ता आहिस्ता कबाड़ में तब्दील हो गया। अस्पताल परिसर के एक कोने में रख दिया गया है।
रिपोर्टिंग
टिंकू दास गुप्ता
ब्लॉक ब्यूरो चीफ, अररिया,बिहार