अररिया जिले में महज 12 घंटे में सांप डंसने के 16मामले मिले है

अररिया (बिहार) ◆अररिया अनुमंडल में शनिवार सुबह 9 बजे से लेकर रात के10 बजे तक सांप डंसने के लिए 16 मामले सामने आए हैं। सांप डंसने के पीड़ितों को सदर अस्पताल अररिया में भर्ती कराया गया है। हालांकि, कई पीड़ितों को चिकित्सकों ने इलाज के बाद घर भेज दिया है। लेकिन अभी भी दो लोगों का इलाज जारी है। पीड़ितों को अस्पताल ही दवा भी उपलब्ध कराया गया है। जो अस्पताल में भर्ती हैं उनकी स्थिति में सुधार है। चिकित्सक के मुताबिक जितने लोग सांप डंसने के शिकार हुए है उनमें दो लोगों को ही जहरीला सांप ने काटा था। शेष को बिना जहर वाले सर्प ने डंसा था। कई पीड़ित ऐसे हैं जो सांप काटने के बाद दहशत में हैं। जिसके कारण भी उनका स्वास्थ बिगड़ गया था।सदर के हृदयपुर निवासी मुन्ना चौहान का पुत्र रणबीर (13) सुबह आंगन में बैठा हुआ था। इसी दौरान उसे सांप ने डंस लिया। परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने इलाज किया। जबकि दो लोग ऐसे थे जिन्हें खलिहान मंे सर्प ने डंसा था। दो बच्चे ऐसे भी मिले जिन्हें खेलने के दौरान झाड़ी के निकट सर्प ने काट लिया था। उधर,सदर अस्पताल में पदस्थापित फिजिशियन डॉ. कुमार मार्तंडेय ने बताया कि सांप काटने पर घबराएं नही, बल्कि प्राथमिक उपचार करें। सर्प डंसने की जगह उन्हें तुरंत बांध दें। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सर्पदंश काटने की दवा की कमी नही है।बारिश के मौसम में बढ़ जाती है सर्प दंश की घटनाएं बारिश के मौसम में जिले में सर्प डंसने की घटना बढ़ जाती है। निचले इलाके में पानी भरने से सांप अब बाहरी इलाके में पहुंच रहे हैं। इसके चलते सांप काटने की घटनाएं बढ़ रही है। जिले में हर साल औसतन 250 से अधिक सर्प डंसने की घटनाएं होती है। जिसमें बारिश के तीन माह में ऐसी घटनाओं की संख्या ज्यादा है। खासकर ये आंकड़े वर्ष 2017 के बाढ़ के बाद जिले में ज्यादा देखने को मिल रही है। सदर अस्पताल में हर दिन औसतन दो मरीज सांप के डंसने के बाद इलाज के लिए आ रहे हैं। सदर अस्पताल का आंकड़ा देखें तो बीते 15 दिनों में कुल 46 लोगों को सांपों ने डंसा है। जिसमें दो लोगों की मौत हो चुकी है। सभी को सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया जाता है डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल 83,000 लोग सांप डंसने का शिकार होते हैं और उनमें से करीब 11,000 की मौत हो जाती है। मौत का सबसे बड़ा कारण है तुरंत प्राथमिक उपचार न होना।

रिपोर्टिंग
राहुल यादव, अररिया,बिहार