अररिया (बिहार) ◆अररिया, दिनांक20 सितम्बर 2025
उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश के आलोक में शनिवार को सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों की मदद करने वाले लोगों अर्थात गुड समेरिटन की सुरक्षा एवं अधिकारों के लिए न्यायिक पदाधिकारियों/कर्मियों, पुलिस पदाधिकारियों/कर्मियों, चिकित्सा पदाधिकारियों/कर्मियों को परमान सभागार समाहरणालय परिसर, अररिया में जिला परिवहन पदाधिकारी, अररिया द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में कुल 198 लोग ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए एवं लगभग 30 लोग भौतिक रूप से शामिल हुए। बैठक में सिविल सर्जन, अररिया, यातायात उप निरीक्षक, प्रवर्तन अवर निरीक्षक, एनएचएआई के कर्मी एवं अन्य पदाधिकारी/कर्मी आदि उपस्थित थे।जिला परिवहन पदाधिकारी अररिया द्वारा बताया गया कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों की मदद करने वाले गुड समेरिटन की सुरक्षा एवं अधिकारों के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा कई दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे व्यक्तियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए या हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। साथ ही पुलिस किसी भी गुड समेरिटन को अपनी पहचान बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है। इसी प्रकार अस्पताल द्वारा गुड समेरिटन को रोका नहीं जा सकता एवं उनसे किसी भी तरह के भुगतान की मांग नहीं किया जा सकता है।न्यायिक अधिकारियों को गुड समेरिटन को अनावश्यक रूप से शमन करने से बचना चाहिए, ताकि ऐसा करने से गोल्डन आवर में अर्थात दुर्घटना के बाद के पहले घंटे में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। साथ ही साथ सड़क सुरक्षा के मद्देनजर जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा एनएचएआई के कर्मियों को साइनेज बोर्ड लगाने, अवैध कट को बंद करने इत्यादि हेतु निदेशित किया गया।सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों की मदद करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश SaveLife Foundation बनाम Union of India (2016) मामले पर आधारित हैं और इन्हें तब तक कानून का बल प्राप्त है जब तक संसद कोई नया कानून नहीं बनाती है
कौन है 'गुड समैरिटन'?
कोई भी राहगीर या bystander जो सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मदद करता है, उसे 'गुड समैरिटन' कहा जाता है। इसमें ये कार्य शामिल हैं:
1. पीड़ित को अस्पताल ले जाना।
2. प्राथमिक चिकित्सा (first aid) देना ।
3. पुलिस या आपातकालीन सेवाओं को सूचित करना।
4. यह सुरक्षा सभी नागरिकों पर लागू होती है, चाहे उनका पेशा कुछ भी हो।
गुड समैरिटन के लिए सुरक्षा और अधिकार
1. मदद करने पर कोई नागरिक या आपराधिक जिम्मेदारी (civil or criminal liability) नहीं होगी।
2. उन्हें अपनी निजी जानकारी बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
3. अस्पताल या पुलिस स्टेशन में उन्हें परेशान या हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
4. वे स्वेच्छा से ही अपनी पहचान बता सकते हैं, यहाँ तक कि Medico-Legal Cases में भी।
विभिन्न संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश
1. पुलिस किसी भी गुड समैरिटन को अपनी पहचान बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
2. उनसे पूछताछ केवल एक बार और उनकी सुविधानुसार समय और स्थान पर की जाएगी।
3. बार-बार अदालत के चक्कर लगवाने की बजाय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हलफनामा (affidavit) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ।1. अस्पतालों को दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तत्काल उपचार देना अनिवार्य है।
2. वे गुड समैरिटन को रोक नहीं सकते या उनसे किसी भी तरह के भुगतान की मांग नहीं कर सकते।
3. अस्पताल के प्रवेश द्वार पर 'गुड समैरिटन को परेशान नहीं किया जाएगा' जैसा एक चार्टर प्रदर्शित करना होगा।
न्यायिक अधिकारी
1. न्यायिक अधिकारियों को गुड समैरिटन को अनावश्यक रूप से समन करने से बचना चाहिए।
2. हलफनामा (affidavit) या कमीशन के माध्यम से साक्ष्य लेने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन से डर को दूर करना और उन्हें सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में अधिक से अधिक जानें बचाई जा सकें।
रिपोर्टिंग
विकाश कुमार सिंह, सहायक ब्लॉक ब्यूरो चीफ, अररिया,बिहार